शिवराज बाबू इतनी जल्दी हार मान गए। तुम अपना अनशन जारी रखो और अपने किसान भाइयों के लिए अपनी जान की बाजी लगा दो।
ऐसे लोमड़ी जैसे कृत्यों से कुछ नहीं होगा। विधानसभा तुम्हारी, लोकसभा तुम्हारी पार्टी की, अब किस पर इल्जाम लगाओगे। बंद करो ये नौटंकी।

Comments

Popular posts from this blog